आधुनिकरण !
रोटी कपड़ा और मकान की तरह अच्छे संस्कार भी इंसान की मूलभूत जरूरतों का ही एक अंग है हमारी जनरेशन वाले पूर्वांचल के बच्चों ने कभी भी अपने माई बाप को "आई लव यू"नहीं कहा होगा, हमारे यहां तो ये सब चोंचले चलते ही नहीं हैं, ना ही हम कभी भी अपने छोटे भाई बहनों को मिस यू लव यू का मैसेज करते है पता नहीं काहे लेकिन हमे लव यू मिस यू कहना कतई मूर्खतापूर्वक लगता है आज भी हमारे बाबूजी जब भी मन चाहता है तब हमें रेल कर एहसास दिला देते हैं कि वे हमारे बाप हैं हमारी माई हमको ज्यादा गाली नहीं देती है बस भरपेट सुना दिया करती हैं लेकिन हमें भरपेट सुनाने के बाद भी हमें भरपेट खाना खिलाना नहीं भूलती हैं, कायदे से अगर देखा जाए तो मुझे तो याद नहीं है कि मैंने कभी अपनी बहनों से यह कहा हो कि मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं ना ही मैंने कभी उनसे यह भी कहा है कि उन दोनों के खुशियों में मेरी जान बसती है ये अलग बात है हम दोनों का हंसता हुआ चेहरा देख कर मेरा दिन बन जाता है ना ही मैंने अपने छोटे भाई से कभी यह कहा है कि तू आगे चल पीछे मैं खड़ा हूं। हमारे घर में हर मुद्दे पर खुलकर बात नहीं होती है, हमारे बाबूजी के...